चुनाव से ठीक पहले नेताओं के ख़िलाफ़ सीबीआई की कार्रवाई क्यों ?

क्राइम रिव्यू लखनऊ : सीबीआई की इतनी ख़राब हालत क्यों है ? हर कोई इसे बंद पिंजरे का तोता क्यों कहता है? एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कहा था। फिर जब भी मौक़ा मिला तब अन्य राजनीतिक दल भी कहने लगे। ममता बनर्जी भी कुछ ऐसा ही आरोप लगा रही हैं। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है। कुछ ऐसे ही आरोप अखिलेश यादव, मायावती, पी चिदंबरम, चंद्रबाबू नायडू जैसे नेता भी लगाते रहे हैं। इन्होंने सीबीआई की कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए। वे आरोप लगाते हैं कि काफ़ी लंबे समय से ये मामले ठंडे बस्ते में थे, लेकिन ऐन लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ लेने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सीबीआई पर विपक्षी दलों और सरकारों को परेशान करने का कोई राजनैतिक दबाव है? तो इनके आरोपों में कितनी सच्चाई है? पढ़िए, एक के बाद एक विपक्षी दलों के नेताओं के ख़िलाफ़ सीबीआई की कैसे चल रही है कार्रवाई।

शारदा स्कैम : पाँच साल बाद जाँच में तेज़ी

शारदा, नारद और रोज़ वैली चिटफंड घोटाले में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेता सीबीआई के निशाने पर हैं। 2014 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सीबीआई ने शारदा घोटाले की जाँच अपने हाथ में ली थी। रोज वैली और नारद घोटाले से जुड़े मामले भी अदालत के आदेश के बाद सीबीआई को सौंपे गए थे।

ढाई साल बाद अखिलेश के क़रीबियों पर छापे सपा-बसपा गठबंधन की बात शुरू ही हुई थी कि अखिलेश के क़रीबियों के 14 ठिकानों पर सीबीआई के छापे पड़ गए। बताया जाता है कि खनन मामले में अखिलेश यादव की भूमिका की भी जाँच की जाएगी। सीबीआई की यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश के ढाई साल बाद हुई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 28 जुलाई, 2016 में सपा सरकार के कार्यकाल में अवैध खनन और मनमाने तौर पर खदानों के पट्टे देने का मामला सीबीआई को सौंप दिया था। अवैध खनन का मामला 2012-16 के बीच का है। तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के पास ही वर्ष 2012-13 के दौरान खनन मंत्री की भी ज़िम्मेदारी थी। एफ़आईआर के अनुसार अखिलेश भी इसकी ज़द में आ सकते हैं। मायावती : दो मामले नहीं टिके, तीसरे में कार्रवाई शुरू दो मामलों में बसपा सुप्रीमो मायावती बच निकलीं तो सीबीआई ने एक तीसरे मामले में शिकंजा कस लिया। पहले दो अलग-अलग मामलों में सबूत नहीं मिले तो केस टिक नहीं पाए थे। लेकिन सीबीआई ने अब तीसरे मामले में जाँच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि चुनाव के बीच ही कभी भी कार्रवाई तेज़ की जा सकती है। यह मामला उनके शासन काल के दौरान 2010-11 में बेची गई 21 सरकारी चीनी मिलों से जुड़ा है। लेकिन सीबीआई ने 2018 में जाँच शुरू की। योगी सरकार ने इस केस को सीबीआई से जाँच कराने की सिफ़ारिश की। बता दें कि पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की जा रही थी। लेकिन सीबीआई साक्ष्य नहीं जुटा पाई और इस कारण मामला बंद हो गया। एक ऐसा ही मामला 14 अरब के स्मारक घोटाले का सामने आया था, जिसमें बसपा सुप्रीमो का नाम उछला था। हालाँकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की जाँच सीबीआई या एसआईटी से कराए जाने की अर्जी ख़ारिज कर दी थी।

रॉबर्ट वाड्रा मामला : दो साल से केस सीबीआई के पास विवादित ज़मीन सौदे के मामले में वसुंधरा राजे सरकार की सिफ़ारिश पर रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी के ख़िलाफ़ अगस्त, 2017 में सीबीआई ने 18 एफ़आईआर दर्ज़ कीं। सीबीआई ने बीकानेर में 2014 में दर्ज़ 18 एफ़आईआर को भी अपने हाथ में ले लिया। जाँच चलती रही। अभी तक सीबीआई न तो सजा दिला पायी है और न ही दोष साबित कर पायी है। मामले की जाँच चल रही है और ख़बरें हैं कि जल्द ही इस पर कार्रवाई तेज़ हो सकती है। इन्हीं ज़मीन सौदों के मामले में 2015 में ईडी ने मनी लाउंड्रिंग का मामला दर्ज़ किया था। नवंबर, 2018 में इस मामले में समन भेजा था। ऐसा ही एक मामला लंदन में ज़मीन सौदा को लेकर मनी लाउंड्रिंग का चल रहा है। जिसमें सीबीआई कोर्ट ने 16 फ़रवरी तक के लिए अंतरिम राहत दे दी है। मामला क्या है? : पुलिस प्रमुख से पूछताछ करने कोलकाता गई सीबीआई टीम हिरासत में, रिहा तीन साल बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा के घर सीबीआई छापा कांग्रेस नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के रोहतक वाले घर में सीबीआई ने कुछ दिन पहले ही छापेमारी की है। यह मामला पंचकूला में असोसिएटेड जर्नल लिमिटेड को प्लॉट आवंटन में गड़बड़ियों से जुड़ा है। बीजेपी सरकार ने साल 2016 में यह मामला सीबीआई को सौंपा था। पंचकूला में प्लॉट आवंटन मामले में हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने पिछले साल नवंबर में सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी दी थी। हुड्डा के ख़िलाफ़ सीबीआई एक अन्य मामले की भी जाँच कर रही है। यह मामला गुरुग्राम में ज़मीन ख़रीद में गड़बड़ियों के आरोप से जुड़ा है जिसमें किसानों को भारी नुक़सान हुआ।

चिदंबरम : 2014 से पूछताछ, फ़ैसला अभी भी नहीं एयरसेल-मैक्सिस मामले में पहली बार दिसंबर, 2014 में पी चिदंबरम से पूछताछ हुई। उनके वित्त मंत्री के कार्यकाल में ही एयरसेल-मैक्सिस सौदा हुआ था। आरोप लगा कि उन्होंने अपने बेटे कार्ति की कंपनी को फ़ायदा पहुँचाने के लिए इस सौदे को मंजूरी दी। इसके बाद पी चिदंबरम और उनके बेटे के ख़िलाफ़ सीबीआई और ईडी जाँच कर रही है। जुलाई, 2018 में कार्ति के ख़िलाफ़ सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की। सीबीआई और ईडी किसी भी मामले में फ़ैसला नहीं आया है। एयरसेल-मैक्सिस सौदे का मामला तब आया जब मई 2011 में तब के टेलीकॉम मिनिस्टर दयानिधि मारन के ख़िलाफ़ सीबीआई में शिकायत की गई। अक्टूबर 2011 में एफ़आईआर दर्ज़ हुई। इसके आधार पर ईडी ने फ़रवरी 2012 में मनी लाउंड्रिंग का केस दर्ज़ किया। नलिनी चिदंबरम पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के ख़िलाफ़ सीबीआई जाँच कर रही है। सीबीआई के मुताबिक़, चिट फंड घोटाले में घिरे शारदा ग्रुप की कंपनियों से उन्हें 1.4 करोड़ रुपये मिले। आरोप है कि उन्होंने शारदा समूह की कंपनियों को गबन और फ़र्ज़ीवाडे़ के मक़सद से शारदा ग्रुप के मालिक सुदीप्त सेन और अन्य लोगों के साथ आपराधिक साज़िश की। हालाँकि, इस मामले में भी आख़िरी फ़ैसला नहीं आया है।

लालू परिवार पर सीबीआई कार्रवाई सीबीआई ने जुलाई, 2017 में पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव के घर पर छापे मारे थे। इससे पहले भी सीबीआई ने कई बार छापेमारी की थी। आरोप हैं कि उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए 2006 में दो सरकारी होटलों के रख-रखाव का टेंडर अपनी क़रीबी दो निजी कंपनियों को दिए। लालू प्रसाद के अलावा इस मामले में उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव का नाम भी दर्ज़ है। सीबीआई का कहना है कि यह मामला 2006 का है, तब लालू प्रसाद रेल मंत्री थे। उस वक़्त रेलवे के राँची और पुरी स्थित दो होटलों के रख-रखाव का टेंडर एक निजी कंपनी सुजाता होटल्स को दे दिया गया था।


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