जब पटेल ने किया कैबिनेट कमेटी की बैठक से वाकआऊट
राष्ट्रवादी अंग्रेजी साप्ताहिक ‘आर्गेनाइजर’ के दीपावली अंक में गत सप्ताह भारतीय सिनेमा के 100 साल पर विशेष परिशिष्ट निकाला गया। इस अंक में मेरे साथ किए गए एक लम्बे साक्षात्कार को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया। पत्रिका के सम्पादक प्रफुल्ल केतकर ने अपने संवाददाता प्रमोद कुमार के साथ इस साक्षात्कार को .....

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टूट गया तिलिस्म
ईमानदार और साहसी होने के रचे गए आभामंडल सच की एक कौंध से कैसे चकनाचूर हो जाते हैं यह चंद घंटों में देश-दुनिया ने देख लिया। तहलका के तेजपाल और आम आदमी पार्टी के केजरीवाल के पीछे लामबंद उनके सारे सिपहसालार एकाएक लोगों के मन से उतर गए।
संयोग है कि जिन तीरों से धर्मनिरपेक्षता के सूरमाओं ने समय-समय प.....

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एक 'खोजी' पत्रकार का हश्र अब जब पोल खुल ही रही है तहलका की, क्यों न मैं एक-दो और खोल दूं
अब जब पोल खुल ही रही है तहलका की, क्यों न मैं एक-दो और खोल दूं आपके लिए। ऐसा करने से पहले यह कहना जरूरी है कि मुझे बेहद खुशी हुई है कि तहलका की पोल खुलने से, क्योंकि कई वर्षों से मालूम था मुझे कि इस तथाकथित खोजी पत्रिका के पन्नों में छिपे हैं कई शर्मनाक राज छिपे इसलिए रहे थे ये राज, क्योंकि हम पत्रक.....

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चुनाव परिणाम बादशाहत के अहंकार पर चोट
{CEIME REVIEW}: ये चुनाव केवल सरकार बनाने के नहीं बल्कि भारत का भाग्य बदलने वाले साबित हो सकते हैं। भारत के इतिहास में पहली बार सारे देश में एक महानायक सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता के रूप में उभरे हैं, इस तथ्य को विपक्षी भी स्वीकार करते हैं। कोई स्मरण करे कि 1950 से 2013 तक ऐसा कौन-सा एक नेता हुआ जिसे.....

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62 बरस का अंधेरा 2014 की उम्मीद तले
15 अगस्त 1947 को आधी रात जब जवाहरलाल नेहरु भारत को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति का एलान दिल्ली में संसद के भीतर कर रहे थे। उस वक्त देश की आजादी के नायक महात्मा गांधी दिल्ली से डेढ़ हजार किलोमीटर दूर कोलकत्ता के बेलीघाट में अंधेरे में समाये एक घर में बैठे थे। और शायद तभी संसद और समाजिक सरोकार के बीच प.....

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