राजनीति में अपराधीकरण देश के लिए सबसे बड़ा संकट
पिछले 65 वर्षों में भारत इतने अधिक संकट से कभी नहीं घिरा था जितना आज प्रतिदिन घिरता जा रहा है। संकट बाहर के कम, अन्दर के, अपनों के और अपने ही नेताओं द्वारा पैदा किए गए अधिक हैं। देश को राजनीति ने चलाना है और पूरी राजनीति भ्रष्टाचार के शिकंजे में सिसक रही है। सच तो यह है कि बाड़ ही खेत को खा रही है।.....

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राहुल गांधी ने 72 घंटे की देर क्यों लगाई
अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को नेता बनने से रोकने के मामले ने जोर पकड़ लिया है। सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था और उसके बाद अध्यादेश और फिर उसके बाद राहुल गांधी ने जिस तरह से जनाकांक्षाओं के अनुकूल बयान दिया उससे पूरे देश में हलचल है। पिछले 2 दिन से मीडिया तो इस बयान को लेकर इतना उत्साहित है कि उसने एक ही स.....

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सरकारी मनमर्जी के कारण घोटाले बंद होना असंभव
हाल ही में जब अमरीका में सरकारी कामकाज ठप्प (शटडाऊन) हुआ था तो संसार में किसी को भी महसूस नहीं हुआ कि वहां सरकार का कामकाज असलियत में ठप्प है। अपितु वहां कामकाज पूरी तरह से चल रहा था। इसके विपरीत भारत में देखने को लग रहा है कि सरकारी कामकाज ठीक-ठाक चल रहा है परन्तु सत्य यह है कि सरकारी कामकाज एक प्र.....

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असाध्य रोग से ग्रसित सी.बी.आई.
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सी.बी.आई.) केवल स्वायत्तता की कमी से ही पीड़ित नहीं। बिरला-पारेख प्रकरण की हैंडलिंग से आभास मिलता है कि यह बहुत गहराई तक गल-सड़ चुकी है। ‘पिंजरे में बंद यह तोता’ बीमारी का शिकार लगता है। आएं हम पारेख-बिरला प्रकरण के कुछ पहलुओं पर नजर डालें। पहले नम्बर पर तो सी.बी.आई. का यह म.....

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राहुल गांधी खुद ही अपने ‘दुश्मन’
क्या आप इस बात से सहमत होंगे कि राहुल स्वयं ही कभी-कभी अपने सबसे बुरे शत्रु सिद्ध होते हैं?’’ पर्टी का अचानक यह सवाल सुनकर मुझे महसूस हुआ कि राहुल के हाल ही के व्यवहार की शायद यही सही व्याख्या है। सरकारी अध्यादेश संवाददाता सम्मेलन में चीथड़े उड़ाने या हाल ही के अपने भाषणों में राहुल द्वारा कही बातों.....

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