अमेरिका में बाजार हारा है, भारत में लोकतंत्र
आर्थिक मंदी को लेकर दुनिया की नामी गिरामी कंपनिया दिवालिया होने की राह पर हैं। असर अमेरिका से भारत तक में नज़र आ रहा है। यह सवाल भी उठ रहा है कि कल तक जो फार्मूले वित्तीय इंजीनियरिंग का कमाल थे, आज वही खलनायक साबित हो चुके हैं। हीरो का खलनायक में बदलना उस व्यवस्था को कैसे बर्दाश्त हो सकता है जो खुद .....

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साधु,सिपाही और मुस्लिम आतंकवाद में कहां है देश
आतंकवाद के घेरे में साधु और सिपाही के आने से झटके में मुस्लिम आतंकवाद पर विराम लग गया है । वह बहस जो हर आतंकवादी हिंसा के बाद "सॉफ्ट स्टेट" को लेकर शुरु होती थी और इस्लामिक आतंकवाद के साथ कभी सीमा पार तो कभी बांग्लादेश तो कभी अलकायदा सरीखे संगठन को छूते हुये पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इर्द.....

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मस्त लोगों के मरे हुये मन
6 जून 1981 को बिहार की बागमती नदी में समस्तीपुर-वनमंखी पैसेंजर गाड़ी के सात डिब्बे टूट कर गिर गये । उस समय दिनमान के संपादक रघुवीर सहाय ने अपने संपादकीय में लिखा-
" रेल दुर्घटना की खबर ने उन्हे छोड़, जिन के अपने सगे उस गाडी में थे, किसी को विचलित नहीं किया।" संपादक के नाम एक ऐसे पत्र को दिनमान क.....

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जहां आतंकवाद की दस्तक नहीं,वहां युद्ध की तैयारी है
आतंकवाद ने जहां दस्तक नहीं दी, वहां युद्ध की आहट हो रही है । आतंकवादी हिंसा ने अपना निशाना भारत की अर्थव्यवस्था को बनाया। आर्थिक सुधार की लकीर में शहरों को जिस तरह शापिंग मॉल में बदल कर नागरिकों को झटके में उपभोक्ता बना दिया गया, उसने लोगों के दिलो दिमाग में मुनाफे और सौदेबाजी की लकीर भी खींच दी। इस.....

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आतंरिक सुरक्षा को खतरे का मतलब ?
माओवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की बात गृह मंत्रालय की रिपोर्ट कर रही है और प्रधानमंत्री माओवाद को देश के आंतरिक सुरक्षा के लिये सबसे बड़ा खतरा बता रहे हैं। सरकार के लिये आंतरिक सुरक्षा के लिये सबसे बड़े खतरे का मतलब देश के बीस से तीस करोड़ लोगों के लिये खींची जाने वाली विकास की लकीर के रास्ते में.....

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