जब सत्ता ही देश को ठगने लगे तो...!!!
एक तरफ विकास और दूसरी तरफ हिन्दुत्व। एक तरफ नरेन्द्र मोदी दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। एक तरफ संवैधानिक संसदीय राजनीति तो दूसरी तरफ हिन्दू राष्ट्र का ऐलान कर खड़ा हुआ संघ परिवार। और इन सबके लिये दाना पानी बनता हाशिये पर पड़ा वह तबका, जिसकी पूरी जिन्दगी दो जून की रोटी के लिये खप जाती है। तो अरस.....

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डल लेक में बेमौसम कमल खिलाकर जम्मू ने सियासत उलट दी !
चुनावी लोकतंत्र फेल हुआ तो बंदूक थामी। सिस्टम को लेकर गुस्सा चरम पर पहुंचा तो पत्थर उठाया। और जिन्दगी जीने की जरुरतो ने सपनों को जगाया तो वोट डाल कर अंगुली पर लोकतंत्र के उसी चिन्ह से एक ऐसी सियासी लकीर खींच दी, जिसे दिल्ली चाहकर भी भूल नहीं सकती है। क्योंकि वोट से परिवर्तन का सपना तो 1987 के बाद से.....

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वहाबी शरिया जिहादी जरिया
अमरीका के बहुचर्चित बुद्धिजीवी सेमुअल हंटिंग्टन ने कभी सभ्यताओं के संघर्ष का सिद्धांत प्रतिपादित किया था। तब प्रगतिशील और उदारवादी लोगों ने यह कह हर उनकी इसलिए खूब खिंचाई की थी कि वे ईसाइयत और इस्लाम के बीच संघर्ष कराना चाहते हैं। लेकिन अब सेमुअल हंस रहे होंगे क्योंकि मुसलमानों में अपनी ही सभ्यता .....

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अब देश का कंधा नहीं सत्ता का धंधा देखें
दलित, किसान और अल्पसंख्यक । तीनों वोट बैक की ताकत भी और तीनों हाशिये पर पड़ा तबका भी । आजादी के बाद से ऐसा कोई बजट नहीं । ऐसी कोई पंचवर्षीय योजना नहीं , जिसमें इन तीनो तबके को आर्थिक मदद ना दी गई हो और सरकारी पैकेज देते वक्त इन्हे मुख्यधारा में शामिल करने का जिक्र ना हुआ हो । नेहरु को भी आखि.....

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पत्रकारिता करते हुये भी पत्रकार बने रहने की चुनौती
पत्रकारिता मीडिया में तब्दील हो जाये। मीडिया माध्यम माना जाने लगे। माध्यम सत्ता का सबसे बेहतरीन हथियार हो जाये। तो मीडिया का उपयोग करेगा कौन और सत्ता से सौदेबाजी के लिये मीडिया का प्रयोग होगा कैसे? जाहिर है 2016 में बहुत ही पारदर्शिता के साथ यह चुनौती पत्रकारिता करने वालेमीडियाकर्मियों के सामने आने .....

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