ईद है मानव से मानव के मिलन का त्योहार



भारतवर्ष की ख्याति जहां यहां के सांप्रदायिक सौहार्द एवं आपसी सद्भावना के कारण है वहीं यहां के पर्व-त्योहारों की धर्म-समन्वय एवं एकता के कारण भी है। इन त्योहारों में इस देश की सांस्कृतिक विविधता झलकती है। यहां बहुत-सी कौमें एवं जातियां अपने-अपने पर्व-त्योहारों तथा रीति-रिवाजों के साथ आगे बढ़ी हैं।

प्रत्येक पर्व-त्योहार के पीछे परंपरागत लोक-मान्यताएं एवं कल्याणकारी संदेश निहित है। इन पर्व-त्योहारों की श्रृंखला में मुसलमानों के प्रमुख त्योहार ईद का विशेष महत्व है। हिन्दुओं में जो स्थान 'दीपावली' का है, ईसाइयों में 'क्रिसमस' का है, वही स्थान मुसलमानों में 'ईद' का है।

ईद का आगमन इस बात का सूचक है कि अब चारों तरफ खुशियों का सुवास फैलने वाला है, जो मनुष्य के जीवन को आनंद और उल्लास से आप्लावित कर देगा। ईद लोगों में बेपनाह खुशियां बांटती है और आपसी मोहब्बत का पैगाम देती है। 'ईद' का मतलब है एक ऐसी खुशी, जो बार-बार हमारे जीवन में आती है। यह खुशी वह मानसिक स्थिति है, जो किसी संयोग श्रृंगार के फलस्वरूप मनुष्य को प्राप्त होती है।

मुसलमान एक वर्ष में दो ईदें मनाते हैं। पहली ईद रमजान के रोजों की समाप्ति के अगले दिन मनाई जाती है जिसे 'ईद-उल-फित्र' कहते हैं और दूसरी हजरत इब्राहीम और हजरत इस्माइल द्वारा दिए गए महान बलिदानों की स्मृति में मनाई जाती है अर्थात 'इर्द-उल-अजीहा।' ईदुल फित्र अरबी भाषा का शब्द है जिसका तात्पर्य अफतारी और फित्रे से है, जो हर मुसलमान पर वाजिब है।

सिर्फ अच्छे वस्त्र धारण करना और अच्छे पकवानों का सेवन करना ही ईद की प्रसन्नता नहीं बल्कि इसमें यह संदेश भी निहित है कि यदि खुशी प्राप्त करना चाहते हों तो इसका केवल यही उपाय है कि प्रभु को प्रसन्न कर लो। वह प्रसन्न हो गया तो फिर तुम्हारा हर दिन ईद-ही-ईद है।

जिंदगी जब सारी खुशियों को स्वयं में समेटकर प्रस्तुति का बहाना मांगती है, तब ईद जैसा त्योहार आता है। ईद हमारे देश ही नहीं, दुनिया का एक विशिष्ट धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक त्योहार है।

'अध्यात्म' का अर्थ है मनुष्य का खुदा से संबंधित होना है या स्वयं का स्वयं के साथ संबंधित होना इसलिए ईद मानव का खुदा से एवं स्वयं से स्वयं के साक्षात्कार का पर्व है। यह त्योहार परोपकार एवं परमार्थ की प्रेरणा का विलक्षण अवसर भी है। खुदा तभी प्रसन्न होता है, जब उसके जरूरतमंद बंदों की खिदमत की जाए, सेवा एवं सहयोग के उपक्रम किए जाएं।

हेमंत कुमार मिश्रा
(प्रधान संपादक )
क्राइम रिव्यु मासिक व साप्ताहिक पत्रिका

Posted By : ( Crime Review )
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