उत्तर प्रदेश के जिला-लखनऊ थाना-गुडम्बा के थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव ने आज ऐसा कृत्य किया कि आप पढ़कर दंग रह जायेंगे ।

कल की बात है कि लखनऊ मे एक कोचिंग पढ़ाने वाले लड़के को डेंगू हो गया जैसे ही यह पता थाना-गुडम्बा के थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव को लगा तुरन्त थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव ने जगरानी हाॅस्पिटल में एडमिट कराया और 10,000 हजार रू0 का आर्थिक सहयोग किया थानेदार के इस कृत्य को जिन लोगो ने भी सुना अपनी दाँतो से अंगुलिया काटने लगे। क्योंकि जिस बच्चे का थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव ने सहयोग किया उसका नाम अंजनि सिहं जिला-गाजीपुर के मूल निवासी है कोचिंग चलाकर अपने और अपने कुटुम्ब जन का जीवन यापन करते और कराते है। अंजनि सिहं का न कोई राजनीतिक पकड़ और न ही माफिया से कोई सम्बन्ध। आश्चर्य की बात यह है कि कोई रूतबा न होते हुए भी थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव मानवीय आधार पर अंजनि सिहं का सहयोग किया। थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव के बारे में जब मैनें अपने स्तर जाँच पड़ताल किया तो पता चला कि यह हकीकत में थाना प्रभारी है।

थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव के आने के बाद तीन कामों मे लगाम लगा है
(1) पैसा लेकर घर कब्जा कराना। (2) पैसा लेकर निर्दोष के खिलाफ मुकदमा लिखना। (3) पैसा लेकर भू-माफियाओं से सांठ-गांठ कर जमीन कब्जा कराना
यहाँ तक की इनके बारें में यह भी पता चला है कि गुडम्बा थाने के पास एक रिटायर्ड सिपाही जो लकड़ी का धंधा करता है उसके जमीन को कब्जा करने के लिए 10 लाख रू0 का आॅफर सहारा स्टेट के कुछ भू-माफियाओं और दलाल पत्रकारों के द्वारा पेशकश की गयी थी लेकिन लेने से इन्कार कर दिया।
मुकदमें लिखने के बारें मे थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव का लोगो से फोन पर यह कहते हुए वाइस रिकाॅर्डिग सुनने को मिली की साहब एक मुकदमा लिखना है बहुत पी0आई0एल0 करता है जो कहिएगा समझ लेगें लेकिन साहब मुकदमा हर हाल मे लिखना है जिसमें थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव यह कहते है भाई सब ठीक है कुछ साक्ष्य लाइए मुकदमा लिख देंगे। ऐसा कृत्य पढ़कर अन्य थानेदारों को भी इनसे सीख लेना चाहिए और पुलिस महकमा के सर्वोच्च अधिकारियों/व्यापारियों को ऐसे थाना प्रभारी को पुरस्कृत भी करना चाहिए। ताकि इनका मनोबल बना रहे।

थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव के पूर्व तो गुडम्बा थाना थाना नही प्रापर्टी डीलर का आॅफिस था थानेदार सिपाहियों द्वारा गरीब आदमी को उठवा लाता था और जब जमीन कब्जा हो जाता था तब छोड़ देता था। पूर्व थाना प्रभारी भी जाति का यादव का था जिसे कप्तान ने फोन पर ही सस्पेन्ट कर दिया था। साढे़ चार साल की सरकार मे चाौकी दर चाौकीदौड़ते रहे लेकिन थानेदार रूपी माथे पर मउर नही चढ़ा। थाना प्रभारी ऋषिकेश यादव भी यादव है इनके कार्यकाल में माफिया, भू-माफिया ऐसे लगते है जैसे आज की ब्याही और कल ही विधवा हो गयी।

Posted By : crime review
Like Us on Facebook