भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश क्या आप कलयुग के भगवान दुर्गा प्रसाद पाण्डेय व डा0 अनूप यादव के साठगाँठ के ऊपर भी क्या रोयेगें ? आपको रोने कीे फुरसत है, तो एक बार जरूर रोइए । माननीय उच्च न्यायालय खण्ड पीठ लखनऊ के माननीय न्यायामूर्ति श्री अमरेशवर प्रताप शाही, सीनियर जज लखनऊ जिन्हें फ्रेश केश सुनने से ही फुरसत नही तो ऐसे में पुराने केसों की सुनवाई करने के लिए कोई व्यवस्था है ? डा0 अनूप यादव आई0ए0एस0, एल0डी0ए0 वी0सी0, जो कि कहते है मै सिस्टम हूँ सिस़्टम भ्रष्ट नही होता भ्रष्टाचार के लिए ही होता है और कैमरा के सामने दुर्गा प्रसाद पाण्डेय के अवैध निर्माण के बारे मे बोलने से इनका रूह काॅपने लगता है और हमारा फोन उठाने का तो जहमत ही नही मोल लेते है ।

इनसे मिलिएं ये है दुर्गा प्रसाद पाण्डेय बहादुरपुर का भगवान श्री कृष्ण, इनके अवैध निर्माणाधीन काम्पलेक्श जिसका एल0डी0ए0 द्वारा ध्वस्तीकरण का आदेश हो चुका है, माननीय उच्च न्यायालय मे मामला विचाराधीन है । इसके बावजूद भी बहादुरपुर का भगवान (श्री कृष्ण) दुर्गा प्रसाद पाण्डेय कुट रचना करते हुए अपनी दुकानों को धोखें से बेच रहा है एवं इनका ऐसा मानना है कि जो भी इनके खिलाफ माननीय उच्च न्यायालय में जाएगा यह उसका शिसुपाल की तरह उसे अपने सुर्दशन चक्र से हत्या कर देगा पहले भी अपने पाँच माफियाओं के द्वारा साठगाँठ करके दो बार असफल हत्या का प्रयत्न कर चुका है जिसकी सूचनाा सम्बन्धित विभाग को लिखित रूप में भी दिया जा चुका है।

यूनिटी सिटी गोल चैराहे के दक्षिण तरफ दुर्गा प्रसाद पाण्डेय का अवैध व्यवसायिक काम्पलेक्श का ध्वस्तीकरण के आदेश होने के बावजूद भी दुर्गा प्रसाद पाण्डेय द्वारा कुट रचना करते हुए भोली-भाली जनता को लखनऊ विकास प्राधिकरण के मिलीभगत से ठगा जाना बदस्तूर जारी है ।

दुर्गा प्रसाद पाण्डेय के अवैध निर्माणाधीन काम्पलेक्श के बारे में जब एल0डी0ए0 से पूछा गया कि आप अवैध निर्माण को रोकते क्यो नही है तो लखनऊ विकास प्राधिकरण के सर्वोच्च पद पर आशीन अधिकारी ने न बताने के शर्त पर बताया कि मिश्रा जी हम इस निर्माण को रोक नही सकते है क्योंकि हमारे ऊपर बहुत दबाव है

हमने लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्रांक संख्या 1583/सचिव/E.E.P(T.G.)/15 दिनांक-03.11.2015, पत्रांक संख्या 1686/सचिव/E.E.P(T.G.)/15 दिनांक-22.02.2015, पत्रांक संख्या 2026/सचिव/E.E.P(T.G.)/16 दिनांक-15.02.2016 को अवैध निर्माण को रोकने हेतु दिया था लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की स्थिल रवैया से यह प्रतीत होता है कि जिले का कप्तान भी कही न कही से बिल्डर के दबाव मे है

आप माननीय हाईकोर्ट से ध्वस्तीकरण का आदेश लाइए हम रात को भी जा के गिरा देगें। पत्र, शिकायतीपत्र कोर्ट का आदेश तक न पुलिस आपकी सहयोग करेगी न लखनऊ विकास प्राधिकरण क्योंकि सभी लोग पैसा खाकर आचेतन अवस्था में चले गये है लखनऊ विकास प्राधिकरण हो या पुलिस महक्मा इनकी चेतना तब जगेगी जब माननीय उच्च न्यायालय का आवमानना की नोटिस देगें ।

हाल ही के मथुरा घटना के बारें में आप तो वाकिफ होगें ही वहाॅ भी आप ही के जैसे कोई अमुख व्यक्ति लगभग तीन वर्ष से पत्राचार, कोर्ट, कचहरी का चक्कर काट रहा था कि अवैध कब्जें को गिराया जायें लेकिन किसी के कान में जू तक नही रेंगता था लेकिन माननीय उच्च न्यायालय की आवमानना की नोटिस मिलते ही अवैध निर्माण तो छोडिए कितनी लाशें गिर गयी किसी को पता नही यहाॅ भी यही होगा जब तक माननीय उच्च न्यायालय का आवमानना की नोटीस नही मिलेगी तब तक शासन और प्रशासन कोई कार्यवाही नही करेगा ।

दुर्गा प्रसाद पाण्डेय द्वारा लगभग 25 दुकानों को विभिन्न ग्राहकों को अवैध रूप से बेच दिया गया है एवं बाकी दुकानो की रजिस्ट्री भी शीघ्रता शीघ्र करवाने का प्रयास किया जा रहा है । दुर्गा प्रसाद पाण्डेय द्वारा ग्राहको को यह बताया जा रहा है कि निर्माणाधीन भवन का मानचित्र लखनऊ विकास प्राधिकरण से स्वीकृत है और निर्माण मानकों के अनुरूप हो रहा है

बहादुरपुर यूनिटी सिटी चैराहे पर दुर्गा प्रसाद पाण्डेय द्वारा निर्माणाधीन काम्पलेक्श शुरूवात से ही विवादों का केन्द्र रहा है। एक तरफ जहाॅ लखनऊ विकास प्राधिकरण शहर में अवैध निर्माणों को रोकनें की कागजी कार्यवाही करती है तो दूसरी तरफ दुर्गा प्रसाद पाण्डेय जैसे मोटी आसामी से मोटी रकम लेकर अवैध निर्माण करवाते है ।

डी0पी0 पाण्डेय द्वारा यूनिटी सिटी गोल चैराहें के पास ग्राम-बहादुरपुर, थाना गुडम्बा, लखनऊ पर निर्मित अवैध व्यवसायिक भवन के सम्बन्ध मे दिये गये प्रशमन (Composition) प्रार्थनापत्र के विरूद्ध हमने आपत्ति दाखिल की है ।

दुर्गा प्रसाद पाण्डेय द्वारा यूनिटी सिटी गोल चैराहे के पास ग्राम-बहादुरपुर, थाना गुडम्बा, लखनऊ पर विकास प्राधिकरण द्वारा बिना मानचित्र स्वीकृत करायें अवैध निर्माण कराया जा रहा था जिसे विकास प्राधिकरण द्वारा सील कर दिया गया था ।

अवैध निर्माणाधीन व्यवसायिक भवन के ध्वस्तीकरण का आदेश विहित प्राधिकारी द्वारा वाद संख्या-332/2015 एवं 215/2015 में दिनांक-10.05.2016 को पारित किया जा चुका है उपरोक्त वर्णित परिस्थितियों के परिणामस्वरूप विहित प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक-10.05.2016 अंतिम हो चुका है और जब तक आदेश दिनांक-10.05.2016 सक्षम न्यायालय द्वारा स्थगित अथवा निरस्त नही किया जाता वो अंतिम एवं प्रभावी रहेगा ।

दुर्गा प्रसाद पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत प्रशमन (Composition) प्रार्थनापत्र इसलिये पोषणीय नही है क्योंकि उनके द्वारा निर्माणाधीन व्यवसायिक भवन अत्यन्त संकरे मार्ग लगभग 6 मीटर मार्ग पर स्थित है और उनके द्वारा निर्माणाधीन भवन मे पार्किग की कोई भी व्यवस्था नही की गई है जिससे आने-जाने वाले व्यक्तियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है ।

दुर्गा प्रसाद पाण्डेय द्वारा निर्माणाधीन व्यवसायिक भवन के अवैध निर्माण के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय में दो जनहित याचिकाएं संख्या-5904(एम0/बी0)/2016 एवं 1029(एम0/बी0)/2016 अभी भी विचाराधीन है ।

दुर्गा प्रसाद पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत प्रशमन (Composition) प्रार्थनापत्र को निरस्त करते हुए उक्त भवन के ध्वस्तीकरण की कार्यवाही प्रारम्भ की जायें। जो कि नितान्त आवश्यक हैं।

दुर्गा प्रसाद पाण्डेय द्वारा भोले-भाले ग्राहको को ठग कर दुकानों को बेचा रहा है और ग्राहको को यह तथ्य नही बताया जा रहा है कि उक्त भवन को ध्स्तीकरण का आदेश पारित हो गया है यह कि उक्त अवैध निर्माणाधीन भवन के ध्वस्त होने की सूरत मे ग्राहकों के हाथ में कुछ भी नही आयेगा ।

दुर्गा प्रसाद पाण्डेय को उक्त निर्माणाधीन भवन में निर्मित दुकानों को बेचने से रोका जाये जिससे कि भोले-भाले ग्राहकों का धन डूबने से बचाया जा सके और उनके साथ कोई धोखा न हो सके ।

इन अवैध निर्माण के विरूद्ध नियमों के अन्तर्गत कठोरत्तम कार्यवाही किये जाने एवं क्षेत्रीय अभियन्ताओं का उत्तरदायित्व निर्धारित कर उनके विरूद्ध भी दण्डात्मक कार्यवाही की जाने नितान्त आवश्यकता है जिससे अवैध निर्माण पर अंकुश लगाया जा सके।

Posted By : Crime Review
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