मिलिए 628 को उम्रकैद और 37 को फांसी की सजा दिलवाने वाले वकील उज्जवल निकम से

उज्जव निकम को मुख्यतौर पर आतंकवाद संबंधी मामलों का मास्टर माना जाता है। कहा जाता है कि अगर केस उन्होंने अपने हाथ में ले लिया तो समझो गुनहगारों को उसके अंजाम तक जरूर पहुंचाएंगे।

आम तौर पर आपने सुना होगा कि बड़ा वकील वही होता है जो गुनहगार को भी आदालत में बेगुनाह साबित कर दे। देश के कई बड़े वकील ऐसा करते भी हैं। लेकिन आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे वकील की जिसके बारे में कहा जाता है कि अगर केस उसने अपने हाथ में ले लिया तो समझो गुनहगारों को उसके अंजाम तक जरूर पहुंचाएगा। अदालत में उसकी दलीलों के सामने बड़े से बड़ा वकील भी अपने दोषी क्लाइंट को नहीं बचा सकता है। हम बात कर रहे हैं 62 साल के सरकारी वकील उज्जवल निकम की जिसने अब तक 628 गुनहगारों को उम्रकैद और 37 को फांसी की सजा दिलवाई है।

1993 मुंबई बम ब्लास्ट मामले में अबू सलेम समेत 5 दोषियों की सजा का एलान हो गया है। दोषियों सजा मिलने के साथ ही एक कॉमन नाम जो फिर से चर्चा में है वो है 62 साल के वकील उज्जवल निकम का, जिन्होंने अदालत में एक लंबी लड़ाई लड़कर दोषियों को सजा दिलाने का काम किया है। उज्जवल निकम के बारे में कहा जाता है कि अगर आतंकवाद या हत्या का मामला उनके हाथ में चला गया तो दोषी को कमसे कम उम्रकैद की सजा तो जरूर होगी। हो सकता है कि निकम दोषियों को फांसी की सजा भी दिलवा दें।

उज्जव निकम को मुख्यतौर पर आतंकवाद संबंधी मामलों का मास्टर माना जाता है। निकम के बारे में कहा जाता है कि वो ऐसे इकलौते वकील हैं जो केस की जांच प्रक्रिया के दौरान गिरफ्तार किए गए निर्दोष लोगों को बरी करने के लिए भी जज के सामने रिक्वेस्ट करते हैं।

आपको बता दें कि 26/11 को हुए मुंबई हमले में पकड़े गए एक मात्र जिंदा आतंकी अजमल कसाब को भी फांसी की सजा उज्जवल निकम ने ही दिलवाई थी। 26/11 मामले में सरकारी वकील बनने के बाद उस वक्त उज्जव निकम ने कहा था कि मैं कसाब को फांसी की सजा दिलवाउंगा।

आतंकी अजमल कसाब को फांसी दिलवाने से लेकर, 1993 के बम धमाकों, गुलशन कुमार हत्याकांड और प्रमोद महाजन हत्याकांड जैसे हाई प्रोफाइल मामलों में सरकारी पक्ष की पैरवी कर चुके हैं। 12 अगस्त 1997 में मुंबई के अंधेरी स्थित जीतेश्वर महादेव के मंदिर में पूजा के लिए गए गुलशन कुमार की हत्या कर दी गई थी, तब निकम ने ही केस की पैरवी की थी।

Posted By : CRIME REVIEW
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