एम नागेश्वर राव को मिला सीबीआई का कार्यभार, आलोक वर्मा के फैसले को पलटा

आलोक वर्मा के तबादले के बाद एम नागेश्वर राव को सीबीआई निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक थे। गुरुवार को जारी हुए सरकारी आदेश के अनुसार, 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी वर्मा को गृह मंत्रालय के तहत अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड्स का निदेशक नियुक्त बनाया गया है।

वहीं पदभार संभालने के बाद नागेश्वर राव ने आलोक वर्मा द्वारा किए गए तबादलों संबंधी फैसले को रद्द कर दिया है।

इससे पहले राव को सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना और तत्कालीन निदेशक आलोक वर्मा के बीच की बहस सार्वजनिक होने के बाद अतिरिक्त निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्मा और अस्थाना के बीच बढ़ते विवाद के बाद 23 अक्तूबर को केंद्र सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था। सरकार के इस फैसले को वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। मंगलवार को अदालत ने उन्हें बहाल किया था। जिसके बाद वह बुधवार को सीबीआई दफ्तर गए थे।

राव 1986 बैच के ओड़िशा कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उनपर भी भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के पास मौजूद जानकारी के मुताबिक, राव की पत्नी मनेम संध्या ने इस कंपनी में अलग-अलग समय पर कुल मिलाकर 60 लाख रुपये का निवेश किया था, जिसमें 38.27 लाख रुपये को बतौर कर्ज दिखाया गया था। इस निवेश के लिए संध्या ने आरओसी से अपने पति नागेश्वर राव का नाम और उनका पता छिपाया था। उन्होंने एम. संध्या के नाम से निवेश करते हुए पति की जगह पिता चिन्नम विष्णु नारायण का नाम दिया था।

जमीन हथियाने के भी हैं राव पर आरोप

राव पर 2011 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक महिला की जमीन हथियाने का भी आरोप लगा। अदालत में चल रहे इस मामले में 2015 में अचानक महज 7 लाख रुपये में समझौता हो गया, जबकि उस जमीन का बाजार भाव कहीं ज्यादा था। इसी तरह राव पर हिंदुस्तान टेलीप्रिंटर लिमिटेड की सिडको इंडस्ट्रियल एरिया की बहुमूल्य जमीन को आवासीय बनाकर कौड़ियों के भाव बेचने के मामले में तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप है।

वर्मा ने शुरू कराई थी जांच

सीबीआई के दक्षिण भारत कार्यालय के तत्कालीन प्रमुख एम. नागेश्वर राव के खिलाफ लगे आरोपों की सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को भी जानकारी थी। उन्होंने इसकी जांच बंगलूरू स्थित सीबीआई की बैंकिंग और गंभीर फ्राड इकाई को सौंपी थी। उसकी रिपोर्ट के आधार पर पर वर्मा ने राव को चेन्नई से हटाकर चंडीगढ़ भेज दिया था, लेकिन सीवीसी से अनुमति न मिलने की वजह से वे राव को एजेंसी से नहीं हटा पाए थे।

Posted By : CRIME REVIEW
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