शिवपाल बोले, माया की तरह अखिलेश ने भी अपनों को धोखा दिया, इनका गठबंधन महज एक ठगबंधन है

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती का गठबंधन महज एक ठगबंधन है। दोनों ने ही अपनों को ठगा है। आने वाले चुनाव में सपा-बसपा को जनता जरूर सबक सिखाएगी। उन्होंने कांग्रेस को सेक्युलर पार्टी बताते हुए कहा कि उससे लोकसभा चुनाव में समझौते की बातचीत की जाएगी। शिवपाल ने यूपी में प्रसपा की मुख्य लड़ाई भाजपा के साथ बताई।

पूर्व राज्यसभा सदस्य मो. अदीब समेत 16 नेताओं के प्रसपा में शामिल होने के अवसर पर शिवपाल सिंह यादव मीडिया से बात कर रहे थे। शिवपाल ने कहा कि वह देश और प्रदेश से भाजपा को हटाकर ही दम लेंगे। सभी छोटी-बड़ी सेक्युलर ताकतों को अपने साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं।

यह पूछे जाने पर कि मायावती ने कहा है कि भाजपा जो धन शिवपाल को खड़ा करने में खर्च कर रही है, वो किसी काम का साबित नहीं होगा, शिवपाल ने कहा कि धोखा देना मायावती की आदत में शामिल रहा है। गुजरात जाकर उन्होंने नरेंद्र मोदी को राखी बांधी और यूपी में लालजी टंडन को भी इसी तरह से राखी बांधी। लेकिन, मायावती ने भाजपा के इन दोनों नेताओं के साथ कैसा व्यवहार किया, सभी जानते हैं।

'मायावती की तरह अखिलेश ने भी अपनों को धोखा दिया'

शिवपाल ने कहा कि मायावती की तरह ही अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा (खुद शिवपाल) को धोखा दिया। इसलिए मायावती और अखिलेश का गठजोड़ ठगबंधन से ज्यादा कुछ नहीं है। चुनाव बाद ये दोनों पार्टिया अपने सांसदों का वोट बेचकर धन उगाही करेंगी।

प्रसपा संयोजक ने कहा कि उन्होंने पूर्व सांसद मो. अदीब को कांग्रेस से चुनावी समझौते के लिए बातचीत करने की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने बैलट पेपर से चुनाव कराने की अपनी पार्टी की मांग भी दोहराई। एक सवाल के जवाब में शिवपाल ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वर्ष 2014 के चुनाव में सपा के किसी नेता ने ईवीएम हैकर्स से कोई बात की थी।

भाजपा के हाथों खेल रहे हैं वसीम रिजवी

शिवपाल ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी भाजपा के हाथों खेल रहे हैं इसलिए मदरसों में आतंकी तैयार करने जैसे अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। सच्चाई तो यह है कि कोई भी धर्म आतंकवाद का समर्थन नहीं करता और न ही इसके समर्थन की बात किसी ग्रंथ में लिखी है।

ये नेता प्रसपा में हुए शामिल

पूर्व राज्यसभा सांसद व अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद अदीब, ऑल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल के महासचिव हाजी मोहम्मद सलीस, हज कमेटी ऑफ इंडिया के पूर्व सदस्य सैय्यद मकसूद अशरफ , अधिवक्ता अशगर खान, राष्ट्रवादी समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जियाउल इस्लाम, सामाजिक कार्यकर्ता जावेद उमर फारूकी, नफीस अख्तर खान, हाजी अख्तर कमाल साहब, हाजी इश्तियाक अहमद निजामी, मुफरान अहमद चांद, इमरान अहमद, अब्दुल रज्जाक मंसूरी, सैय्यद हम्मान अशरफ, फैजुल हसन, इंद्रमणि उर्फ पप्पू यादव आदि।

Posted By : Crime Review
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