इशरत जहां केस: कानून मंत्रालय ने अनुमति के वास्ते कानूनी राय देने से किया इनकार

नई दिल्ली Crime Review: अपर्याप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए कानून मंत्रालय ने इस विषय पर कानूनी राय देने से इनकार कर दिया है कि इशरत जहां मुठभेड केस में खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी लेना जरूरी है या नहीं। सरकार के कानूनी अंग ने सीबीआई से कहा है कि विशेष निदेशक (अब सेवानिवृत) राजिंदर कुमार और तीन अन्य अधिकारियों- पी मित्तल, एम के सिन्हा और राजीव वानखेड़े के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पूर्व अनुमति की जरूरत है या नहीं- इस पर वह अपनी कानूनी राय दे, उससे पहले वह उसके सामने पर्याप्त दस्तावेज लेकर आए।

हाल ही में सीबीआई ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के माध्यम से कानून मंत्रालय से इस विषय पर कानूनी राय मांगी थी। समझा जाता है कि कानून मंत्रालय ने जब दस्तावेज मांगे तब सीबीआई ने कहा कि वह अटार्नी जनरल के साथ दस्तावेज साझा तो कर सकती है लेकिन उसकी प्रतियां नहीं दे सकती क्योंकि वे संवेदनशील हैं। इस पर कानून मंत्रालय ने सुझाव दिया कि एक सीबीआई अधिकारी दस्तावेजों को ला सकता है ताकि उसके :काूनन मंत्रालय के: अधिकारी कुछ राय देने से पहले उन कागजातों पर गौर कर सकें। कानून मंत्रालय यह भी चाहता है कि खुफिया ब्यूरो का प्रशासनिक मंत्रालय- गृहमंत्रालय सीबीआई के सवाल पर अपनी राय दे।

सीबीआई ने कहा कि उसने इस मुठभेड़ के पीछे की साजिश में कथित रूप से संलिप्त अधिकारियों की भूमिका के बारे में सारे सबूत इक_ा कर लिए हैं लेकिन इस बात पर अंतर्विरोधी राय हैं कि उन पर मुकदमा चलाने के लिए गृहमंत्रालय की अनुमति जरूरी है या नहीं। एक राय यह है कि कुमार कथित अपराध के समय चूंकि सेवा में सक्रिय थे, इसलिए उन पर मुकदमा चलाने के लिए गृहमंत्रालय की अनुमति जरूरी है क्योंकि वह आईबी का कैडर नियंत्रक प्राधिकार है।

दूसरी राय यह है कि चूंकि कुमार इस साल जुलाई में सेवानिवृत हो गए, ऐसे में जांच एजेंसी (सीबीआई) मुकदमा चलाने के लिए अनुमति लिए बगैर ही अपने आरोपपत्र पर आगे बढ़ सकती है। यदि कानून मंत्रालय कहता है कि गृहमंत्रालय की अनुमति जरूरी है तो सीबीआई गृहमंत्रालय से आईबी के इन अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के वास्ते अनुमति मांग सकती है।

Posted By : Crime Review
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