जाति देखकर यदि गरीबत नहीं आती तो जातियों के आधार पर आरक्षण क्यों दिया जाए?

जाति देखकर यदि गरीबत नहीं आती तो जातियों के आधार पर आरक्षण क्यों दिया जाए?

जातिगत आरक्षण भ्रष्टाचार का दूसरा स्वरूप और सामाजिक बुराई है !जातिगत आरक्षण सामाजिक अन्याय है इसे समाप्त करने का संकल्प करो !

आरक्षण सामाजिक न्याय कभी नहीं हो सकता ,आरक्षण की व्यवस्था केवल उनके लिए होनी चाहिए जो काम करने लायक न हों अपाहिज हों,अनाथ हों,अनाश्रित हों,असाध्यरोगी हों,पागल हों अत्यंत परेशान हों ,अत्यंत पीड़ित हों ,अत्यंत गरीब होने के बाद भी शारीरिक लाचारी के कारण बेचारे कमाने लायक न रह गए हों! ऐसे लोगों के विषय में जाति,क्षेत्र,समुदाय,संप्रदाय,स्त्री-पुरुष आदि भेद भावनाओं से ऊपर उठकर मदद की जानी चाहिए अर्थात ऐसे लोगों को आरक्षण माँगना अर्थात ये जो कुछ करने लायक हों वे पद ऐसे लोगों के लिए आरक्षित कर दिए जाने चाहिए जैसे किसी के पैर कट गए हों किन्तु वह शिक्षित होने के कारण शिक्षा से जुड़े कार्य कर सकता हो पढ़ा सकता हो तो ऐसे कामों में इनका सौ प्रतिशत आरक्षण इन्हें दिया जान चाहिए ताकि ये भी उत्साह एवं स्वाभिमान पूर्वक जीवन जी सकें !जो स्वस्थ हैं वो तो कुछ भी कर के कमा खा लेंगे।

इसलिए आरक्षण की व्यवस्था हमेंशा उन लोगों के लिए की जानी चाहिए जो लोग कुछ करने लायक न रह गए हों अपाहिज हों किन्तु जो करने लायक हों और कुछ करना चाहते हों सरकार उन्हें शिक्षित करने में सहायता करे उन्हें उनके लायक रोजगार उपलब्ध करावे,कम ब्याज पर बाधा मुक्त ऋण देने की व्यवस्था करे इनमें सरकार को चाहिए कि पक्षपात विहीन होकर सभी के साथ समान दृष्टि से न्याय करे किसी को ऐसा नहीं लगना चाहिए कि उसके साथ अन्याय हो रहा है क्योंकि प्रजा प्रजा में भेद करना अन्याय भी है अत्याचार भी है अपराध भी है और सबसे बड़ा पाप भी !

कोई भी पूरी जाति,पूरा क्षेत्र और सम्पूर्ण सम्प्रदाय कभी अपाहिज, असाध्य या अक्षम नहीं हो सकता यदि यह सच है तो किसी पूरी जाति,पूरे क्षेत्र और सम्पूर्ण सम्प्रदाय को सरकार आरक्षण जैसा विशेष दर्जा क्यों दे ?उसके लिए तो अन्य लोगों की तरह ही सारे देश के सभी स्कूल पढ़ने के लिए खुले हैं और प्राइवेट या सरकारी नौकरियों के लिए सभी संस्थान समानरूप से अवसर दे रहे हैं व्यापार के लिए सारा मार्केट खुला हुआ है फिर भी जो लोग पिछड़े हैं उसमें समाज का दोष क्या है आखिर समाज क्यों ऐसे लोगों का बोझ ढोता फिरे !

लाख टके का सवाल यह है कि स्वस्थ होने पर भी आरक्षण पाने की इच्छा रखने वाले लोगों से शपथ पूर्वक पूछा जाना चाहिए कि यदि सवर्ण वर्ग के गरीब लोग परिश्रम पूर्वक काम करके बिना आरक्षण के अपनी तरक्की कर सकते हैं तो आप में ऐसी कमजोरी क्या है आप क्यों हिम्मत हार रहे हैं आखिर आपको क्यों लगता है कि अपने परिश्रम के बल पर हम तरक्की नहीं कर सकते ! आखिर आप में ऐसी कमजोरी क्या है?और यदि वास्तव में आप अपने को कमजोर मान ही बैठे हैं तो अपने को ठीक करा लीजिए जाँच कराइए इलाज कराइए इसमें सरकार का सहयोग लीजिए और फिर परिश्रम पूर्वक काम करके अपनी तरक्की आप स्वयं भी कर सकते हैं इससे आपका उत्साह बढ़ेगा जिससे आप सवर्णों से केवल बराबरी ही नहीं कर सकते हैं अपितु उन्हें पछाड़ भी सकते हैं न केवल इतना अपितु परिश्रम पूर्वक काम करके अपनी तरक्की करने से जिस उत्साह एवं स्वाभिमान का प्राकट्य होगा उससे पीढ़ियों की पीढ़ियाँ पवित्र हो जाएँगी हर कोई आपको अपना आदर्श मानेगा और आदर करेगा !किन्तु आरक्षण के द्वारा ये सब चीजें नहीं मिल पाएँगी केवल पेट भरने का साधन बनता रहेगा वो भी आरक्षण से ! पेट तो पशु भी भर लेते हैं वह भी बिना किसी आरक्षण के इसलिए केवल पेट भरने के लिए ही सारी कवायद क्यों?सच्चाई के साथ आत्मबल एवं मनोबल बढ़ाने के लिए कुछ कीजिए-

जो लोग कहते हैं कि पहले सवर्णों ने हमारा शोषण किया था इसलिए हम पिछड़ गए हैं किन्तु यह कई कारणों से सच नहीं है पहला कारण तो यह है कि कब शोषण हुआ था! किसने किया था! कितना किया था !किस प्रकार से किया था! दूसरा सहने वालों ने सहा क्यों था उन्होंने विरोध क्यों नहीं किया था ! क्योंकि सहने वालों की संख्या बहुत अधिक थी इसलिए ये भी नहीं कहा जा सकता है कि भयवश इन लोगों ने अपना शोषण सह लिया होगा, इसलिए सच्चाई तो यही है कि पहले भी किसी ने किसी का शोषण किया ही नहीं होगा! और यदि शोषण की बात को सच मान भी लिया जाए तो पिछले लगभग 60 वर्षों से तो आरक्षण ले रहे हैं वो लोग! आखिर क्यों नहीं कर ली तरक्की?60वर्ष भी थोड़े तो नहीं होते हैं।

इसलिए यदि अपने पीछे रह जाने के प्रकरण में आत्म मंथन करके यदि अपनी कमजोरी नहीं खोज पाए और उनका सुधार नहीं किया तो कैसे हो पाएगा विकास ?ऐसे तो सवर्णों के शोषण का रोना धोना लेकर बैठे रहेंगे 60 क्या 600 वर्षों में भी अपना उत्थान कर पाना असम्भव होगा ! आरक्षण तो किसी की कृपा से प्राप्त अवसर है याद रखिए कि किसी की कृपा पूर्वक प्रदान की गई आजीविका कभी आत्मबल या मनोबल नहीं बढ़ने देगी।

Posted By : Dr. S. N. Vajpayee, :M A jyotish: M A Sanskriit Grammar: Jurnalisim P G D : M .A. Ph. D. Hindi(Jyotish) By B.H.U.
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