भाजपा एक और गलत फैसला करते-करते बची

भाजपा नेतृत्व द्वारा गत वर्ष अपने गठबंधन सहयोगियों तथा वरिष्ठï पार्टी नेता श्री लाल कृष्ण अडवानी की असहमति के बावजूद नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करने पर न सिर्फ इसके प्रमुख सहयोगी जद (यू) ने इससे गठबंधन तोड़ लिया बल्कि श्री अडवानी ने भी पार्टी के सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया था और बड़ी मुश्किल से उन्हें मनाया जा सका।

यही नहीं, पार्टी नेतृत्व द्वारा कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा व मंगलौर हमले के आरोपी प्रमोद मुतालिकको पार्टी में शामिल करने के फैसले का पार्टी की दूसरी बड़ी नेता सुषमा स्वराज ने भारी विरोध किया जिस पर पार्टी नेतृत्व को अपना निर्णय पलटना पड़ा परंतु अभी भी भाजपा नेतृत्व ने मनमाने ढंग से महत्वपूर्ण मामलों पर निर्णय लेने का सिलसिला छोड़ा नहीं।

इसका ताजा उदाहरण जद (यू) से निष्कासित पूर्व सांसद साबिर अली को पार्टी में शामिल करना था जिसके विरुद्ध पार्टी के ‘मुस्लिम फेस’ एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने विद्रोह कर दिया और साबिर को आतंकी यासीन भटकल का दोस्त बताते हुए कहा कि ‘‘इस तरह तो जल्दी ही आतंकवादी दाऊद (इब्राहिम) को भी पार्टी में शामिल कर लिया जाएगा।’’

पार्टी आलाकमान को लिखे पत्र में नकवी ने आरोप लगाया कि ‘‘साबिर अली व भटकल का एक-दूसरे के घर आना-जाना रहा है तथा कुछ समय पूर्व भटकल को मुम्बई स्थित अली के घर से गिरफ्तार भी किया गया था। साबिर अली के तार गुलशन कुमार हत्याकांड से भी जुड़े हुए हैं जिसे दाऊद इब्राहिम के इशारे पर अंजाम दिया गया था।’’

कुछ अन्य भाजपा नेताओं के अलावा संघ नेतृत्व ने भी साबिर अली को पार्टी में शामिल करने पर अप्रसन्नता जताई तो पार्टी को यह निर्णय आखिर वापस लेना पड़ा। पार्टी नेताओं की ऐसी ही कार्यशैली के चलते और इसके नेताओं द्वारा लिए जाने वाले विवादास्पद निर्णयों के कारण भाजपा की छवि को आघात लग रहा है जिससे इसे बचना चाहिए।

Posted By : Crime Review
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