पाकिस्तानी ‘सेना की मनमानियां’ व ‘भारत विरोधी एजैंडा’ जारी

पिछले साल पाकिस्तान ने 503 बार भारतीय सीमाओं का अतिक्रमण किया और इस साल भी यह सिलसिला जारी है। पिछले तीन दिनों से पाकिस्तान अनेक भारतीय चौकियों पर गोलीबारी कर चुका है जिसके जवाब में बी.एस.एफ. के जवानों ने पाकिस्तान के 5 रेंजर मार गिराए जबकि 3 जनवरी को पाकिस्तानी सैनिकों ने एक भारतीय महिला व 2 जवानों को शहीद कर दिया।

जैसे कि इतना ही काफी नहीं था, नए साल के मौके पर पाकिस्तानी सेना ने 2008 में 26/11 के मुम्बई कांड जिसमें 175 लोग मारे गए थे, को दोहराने की कोशिश की लेकिन उसका यह मंसूबा इस बार कामयाब न हो सका।

भारत के पश्चिमी तट की रक्षा के लिए तैनात तटरक्षकों ने 31 दिसम्बर की रात को अरब सागर में भारत-पाकिस्तान की सीमा के पास विस्फोटकों से लदी एक नौका पकड़ ली जिसमें 4 व्यक्ति सवार थे। पीछा करने पर उसमें सवार लोगों ने स्वयं को विस्फोट से उड़ा दिया जबकि ऐसी सूचना भी है कि उन लोगों ने विस्फोट से पूर्व पानी में छलांग लगा दी थी।

समझा जाता है कि पाक नौका पर सवार लोग किसी अन्य भारतीय नौका का हाईजैक करके कोई बड़ी आतंकी योजना को अंजाम देने के इरादे से भारत में दाखिल होना चाहते थे लेकिन 2008 की घटना से सबक लेते हुए भारतीय जलसेना द्वारा तटरक्षा के प्रबंधों में किए गए सुधारों की बदौलत वे अपने मंसूबों में सफल न हो सके। यह नौका कराची के ‘केटी बंदर’ से रवाना होने के समय से ही भारतीय गुप्तचर एजैंसी के निशाने पर थी।

2008 में लश्कर के आतंकवादी मुम्बई में एक भारतीय नौका हाईजैक करके मुम्बई के 8 कि.मी. निकट तक आ गए थे। ‘अजमल कसाब’ व उसके 9 साथियों ने हाईजैक की हुई नौका कब्जे में लेकर उसके 4 सदस्यों की हत्या कर दी थी और नौका के कप्तान को उन्हें मुम्बई तट तक पहुंचाने के लिए विवश करने के बाद गला काट कर उसकी हत्या भी कर दी और फिर एक स्पीड बोट से मुम्बई शहर में पहुंचने में सफल हो गए।

इसके विपरीत बुधवार रात को भारतीय तटरक्षक नौकाओं तथा डोनयर विमानों ने भारतीय तट से लगभग 370 कि.मी. की दूरी पर इस संदिग्ध पाकिस्तानी नौका को रोक दिया। इस संबंध में एडमिरल राजा मैनन ने कहा है, ‘‘26/11 के बाद से हमने काफी सबक सीख लिए हैं। जिस गति से तटरक्षकों ने इस पाकिस्तानी नौका को रोकने के लिए कार्रवाई की वह सराहनीय है।’’

पाकिस्तान के निकट होने के कारण गुजरात की 1660 कि.मी. तट रेखा काफी संवेदनशील है। मुम्बई के हमलों के बाद भारत सरकार ने भारतीय तटरक्षकों को केंद्रीय और राज्य सरकार की सुरक्षा एजैंसियों के साथ तालमेल रखने के अलावा समुद्र में गश्त करने की जिम्मेदारी भी सौंप दी है।

हालांकि पाकिस्तान ने यह कहा है कि भारत के कब्जे में अनेक पाकिस्तानी नौकाएं हैं और भारत ने इस नौका को उड़ाकर एक ड्रामा ही किया है लेकिन पाकिस्तान के एक समाचारपत्र ‘हैरल्ड मैगजीन’ के आबिद Þसैन ने लिखा है कि अतीत में भी पाक जासूसी एजैंसियां भारतीय पानियों में ऐसी कार्रवाइयां कर चुकी हैं और हो सकता है कि इस मामले में भी नौका में सवार लोगों को पकड़े जाने पर अपने आपको उड़ा देने का आदेश दिया गया हो।

इस नाकाम हमले के उद्देश्य के संबंध में तरह-तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार इसका उद्देश्य 7 से 9 जनवरी तक गुजरात के गांधीनगर में होने वाले ‘एन.आर.आई. सम्मेलन’ को निशाना बनाना या 11 से 13 जनवरी तक गांधीनगर में ही होने वाले 16 देशों के प्रतिनिधित्व वाले ‘वाइब्रैंट गुजरात’ सम्मिट की सुरक्षा में सेंध लगाना या गणतंत्र दिवस के अवसर पर ‘अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा’ को रद्द करवाना हो सकता था।

बेशक भारतीय तटरक्षकों की त्वरित कार्रवाई से पाकिस्तानी नौका नष्ट हो गई है परंतु उसमें सवार लोगों के जीवित या मृत होने के संबंध में बरकरार शंका चिंताजनक है। शायद वे बचकर मुम्बई या किसी अन्य भारतीय क्षेत्र में न जा छुपे हों और यदि ऐसा होता है तो यही समझना होगा कि खतरा अभी टला नहीं है।

हालांकि नवाज शरीफ भारत के साथ संबंध सुधारने को सचेष्ट हैं और उन्होंने कहा भी है कि आतंकवाद के विरुद्ध अब निर्णायक लड़ाई लडऩे का समय आ गया है परंतु ऐसा लगता है कि पाकिस्तान में हालात अभी भी उनके काबू से बाहर हैं और सेना अपनी मनमानियां कर रही है।

Posted By : CRIME REVIEW
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