जब महात्मा गांधी ने कांग्रेस को ‘दफनाने’ की बात कही

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की निष्क्रियता एक ओर जहां उनका ट्रेडमार्क बन चुकी है, वहीं यह कांग्रेस की संस्कृति के विषय में उनकी गहरी समझ की भी परिचायक है। अक्सर चुप रहने वाले शांत स्वभाव के मनमोहन सिंह भारत की इस सबसे पुरानी पार्टी के बारे में हर प्रकार की जानकारी रखते हैं, जिसने उन्हें मई 2004 में किसी चमत्कार की तरह प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा दिया था। उन्हें शायद काफी पहले ही इस बात का बोध हो गया था कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लडऩा व्यर्थ है क्योंकि यही तो इस पार्टी की जीवन-रेखा है। इसके अलावा सभी पार्टियां कम या अधिक हद तक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। शायद इसी अनुभूतिपूर्ण विवेक के चलते वह कुछ न करने की नीति को जायज ठहराते हैं।

यह मानना होगा कि दिलेर राजनीतिज्ञ ही भारतीय राजनीति की घोर गंदगी को साफ करने का इरादा धारण करके अपने करियर को दाव पर लगाएगा। जरा महात्मा गांधी के वे शब्द याद करें जो उन्होंने 1935 के गवर्नमैंट ऑफ इंडिया एक्ट के अंतर्गत बनी प्रांतीय सरकारों के कांग्रेसी मंत्रियों के बिल्कुल पहले दस्ते के व्यवहार पर व्यथित होते हुए कहे थे। 2 वर्ष से कुछ ही अधिक अवधि में ये मंत्री अपने घर और जेबें भरने के लिए बदनाम हो गए थे।

राष्ट्रपिता इस बात पर इतने गुस्से में थे कि उन्होंने कांग्रेसी मंत्रियों के प्रति घोर घृणा व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे व्यापक भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने की बजाय मैं कांग्रेस पार्टी को ही शानदार ढंग से दफन करने को प्राथमिकता दूंगा।’’

हमारा दुर्भाग्य है कि भ्रष्टाचार और नैतिक पतन की दलदल में फंसे आज के राजनीतिक तंत्र को हांक कर सीधे रास्ते पर लाने वाला महात्मा गांधी जैसा कोई मार्गदर्शक नहीं। केवल पैसा बनाना ही एकमात्र आदर्श बन गया है और राजनीति ही इस काम को अंजाम देने का सबसे पसंदीदा रास्ता है।

कांग्रेस जितने ही पुराने हैं इसके घोटाले
हमने महात्मा गांधी के जीवन के इस छोटे से संस्मरण का उल्लेख इसलिए किया कि 7 दशक बाद भी इसकी सत्यता और प्रासंगिकता अक्षुण्य बनी हुई है। गत सप्ताह संसद में विपक्ष ने घोटालों की भारी संख्या का मुद्दा उठाया और सत्तारूढ़ कांग्रेस के कर्णधारों ने जिस ढीठताई और दृढ़ता से इन पर किसी भी चर्चा को असफल बना दिया, उससे यह तथ्य रेखांकित होता है कि 30 के दशक से लेकर आज तक पार्टी के डी.एन.ए. में कोई बदलाव नहीं हुआ। आज भी यह पार्टी सत्ता और सुख की अभिलाषा पूरी करने का सबसे सस्ता तरीका बनी हुई है।

महात्मा गांधी के गुस्से का शिकार होने वाले पुराने कांग्रेसियों की कमीनगी की ‘दाद’ देनी चाहिए कि उन्हीं की बदौलत भ्रष्टाचार का वायरस इस देश के जनजीवन की गहराइयों तक रच-बस गया है। कानून के राज का बोलबाला न होने के कारण भ्रष्ट और अपराधी लोग बिना किसी डर, भय और रुकावट के दिलेरी से अवैध गतिविधियां जारी रखे हुए हैं क्योंकि जिन लोगों ने उनको दंडित करना है वे स्वयं उनकी कमाई में से हिस्सा लेते हैं।

प्रत्येक अशोक खेमका और दुर्गा शक्ति नागपाल के मुकाबले हजारों नीरा यादव भी हैं जो लूट में हिस्सा बटाने के लिए भ्रष्ट राजनीतिज्ञों का हुक्म बजाने को उतावले हैं। व्यावाहरिक रूप में हम सभी भ्रष्टाचार की इस फल-फूल रही संस्कृति में भागीदार हैं। आप इस भ्रम में न रहें कि खेमका ने जो रहस्योद्घाटन किए हैं वे कोई नई बात हैं।

कांग्रेसी समाजवाद के उत्थान के दौर यानी कि 60 और 70 के दशक में जब वी.पी. नायक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और रजनी पटेल मुम्बई कांग्रेस के अध्यक्ष थे तो दोनों ने अरब सागर में मिट्टी डालकर नया क्षेत्र विकसित करने के लिए लाइसैंसों का आबंटन किया। इसी स्थल पर आज नरीमन प्वाइंट का कारोबारी इलाका स्थित है।

दोनों के पास ऐसी करिश्माई शक्तियां थीं कि वे रातों-रात भिखारी को करोड़पति बना सकते थे। नायक सरकार द्वारा किसी को समुद्री क्षेत्र में मिट्टी भरकर 3 एकड़ का भूखंड विकसित करने की अनुमति का कागज का एक टुकड़ा उसे इतना शक्तिशाली बना देता था कि बड़े-बड़े बिल्डर उन्हें बैठे-बिठाए करोड़ों रुपए का लाभ देने को तैयार हो जाते थे। वास्तव में तो नायक सरकार ही उनके लिए ऐसे बिल्डर ढूंढ देती थी। यही कारण है कि नरीमन प्वाइंट में इन बिल्डरों के बड़े-बड़े अक्षरों में लिखे नाम आज भी दिखाई देते हैं।

सीधी-सी बात है कि कांग्रेस कृषि भूमि को आवासीय व व्यावसायिक स्थलों में बदलने के नाम पर धारा 4 के अंतर्गत अधिग्रहण अधिसूचनाएं जारी करके और फिर हमजोली राजनीतिज्ञों व भू-माफिया को रियायती दरों पर जमीन खरीदने की अनुमति देकर व तत्पश्चात अधिसूचना को निष्प्रभावी होने देकर कई दशकों से सार्वजनिक भूमि से खिलवाड़ करती आ रही है।

शायद ज्यादा लोगों को इस बात का ज्ञान नहीं होगा कि 80 के दशक में कानून का अक्षरश: पालन करने वाले दिल्ली के उपराज्यपाल जगमोहन ने धारा 4 के अंतर्गत दक्षिण दिल्ली के छतरपुर मैहरोली काम्पलैक्स में एक बड़े भूखंड का अधिग्रहण करने के लिए अधिसूचनाएं जारी की थीं। रातों-रात ही संभ्रांत और शक्तिशाली लोग उनके विरुद्ध हो गए और उनकी बदली गोवा में करवा दी गई। धारा 4 के अंतर्गत जारी की अधिसूचना तो एक अरसे के बाद स्वयं ही निष्प्रभावी हो गई लेकिन भू-सट्टेबाजों ने खूब हाथ रंग लिए।

वास्तव में कांग्रेस पार्टी अनेक दशकों से फटाफट अमीर बनाने का कारोबार कर रही है। वर्तमान में फर्क केवल इतना पड़ा है कि अब 24&7 टी.वी. चैनलों के चलते इतना हंगामा मचता है जिसकी नेहरू, इंदिरा और राजीव के समय में कभी कल्पना भी नहीं की गई थी। उस समय प्रिंट मीडिया भी आकार में छोटा था और सत्ताधीशों से भयभीत था। सरकार की बात न मानने वाले किसी भी अखबार को बहुत आसानी से नकेल डाली जा सकती थी क्योंकि अखबार मालिकों को जिस महंगे न्यूज प्रिंट की जरूरत होती थी उसका कोटा कांग्रेसी सत्ताधीशों द्वारा ही जारी किया जाता था।

इस चर्चा का यह अभिप्राय नहीं कि हम भ्रष्टचार के विरुद्ध लडऩे वालों और सच्चे सुधारकों को हतोत्साहित करना चाहते हैं। बल्कि हम उन्हें आगाह करना चाहते हैं कि राजनीतिक वर्ग के डी.एन.ए. को बदलना लगभग असंभव है क्योंकि अनेक वर्षों के शासन के दौरान यह इस कला में पारंगत हो गया है कि जिन लोगों के नाम पर सत्ता हथियाई जाती है उन्हीं की पीठ में छुरा कैसे घोंपना है?

भूला-बिसरा दामाद
जवाहर लाल नेहरू के दामाद फिरोज गांधी 1952 से 1957 तक रायबरेली से लोकसभा के सांसद थे। उन्होंने केवल अपने ही दम पर मुंदड़ा घोटाले का पर्दाफाश किया था और पंडित नेहरू को बंबई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एम.सी. छागला की अध्यक्षता में अदालती जांच बैठाने को मजबूर कर दिया था। जांच में खुलासा हुआ कि हरिदास मुंदड़ा ने भारतीय जीवन निगम को भारी चूना लगाया था।

बाद में फिरोज गांधी ने यह भी पर्दाफाश किया कि राम किशन डालमिया ने मीडिया जगत की कारोबारी बैनेट कोलमैन एंड कम्पनी का अधिग्रहण करने के लिए किस प्रकार बैंक और बीमा कोष का दुरुपयोग किया।

आज गांधी-नेहरू परिवार से संबंधित अन्य सभी सदस्यों के जन्म और मृत्यु दिवस मनाने के लिए करोड़ रुपए उड़ा दिए जाते हैं लेकिन फिरोज गांधी का नाम तक नहीं लिया जाता। मेरा सुझाव है कि अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को चाहिए कि उन्हें अपना ले और आगामी 8 सितम्बर को उनका जन्मदिन मनाए। यही भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष करने वाले इस राजनीतिज्ञ को सही श्रद्धांजलि होगी।

Posted By : BIPIN CHANDRA MISHRA (Editor)
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