बीजेपी का साउथ में `समझौता`

केंद्र में सत्ता पाने की कोशिशों में जुटी बीजेपी लगातार एनडीए का कुनबा बढ़ाने में जुटी है...तमिलनाडु की पांच पार्टियां एनडीए में शामिल हो गई हैं। इनमें एस रामदौस की पीएमके, वाइको की एमडीएमके और विजयकांत की डीएमडीके भी शामिल है...।
बीजेपी ने इन पार्टियों के साथ सीट को लेकर समझौता भी कर लिया है ...तमिलनाडु में बीजेपी 8 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि उसकी सहयोगी पार्टियां डीएमडीके 14, पीएमके 8, एमडीएमके 7 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी जबकि KMDK और IJK एक-एक सीट पर चुनाव लड़ेंगीं...। बीजेपी में इन पार्टियों के साथ समझौते को लेकर खासा उत्साह नज़र आ रहा है...इसी उत्साह के बल पर बीजेपी कांग्रेस के राज से मुक्ति और एक नए भारत के निर्माण का ऐलान कर रही है...लेकिन इस उत्साह के बीच बीजेपी शायद ये भूल गई है कि बीजेपी ने जिन पार्टियों के साथ गठबंधन किया है उसमें ऐसी पार्टियां भी हैं, जिन पर गंभीर आरोप हैं...जो बीजेपी उत्तर भारत में भ्रष्टाचार का विरोध करती है...देश की अखंडता को चुनौती देने वाली ताकतों का विरोध करती है वही बीजेपी दक्षिण भारत में एनडीए का कुनबा बढ़ाने के लिए उन पार्टियों से समझौता करती है जिस पर इसी तरह के आरोप हैं...।
पीएमके के संस्थापक और वर्तमान अध्य़क्ष एस रामदौस पर जाति आधारित दंगे भड़काने के आरोप हैं... रामदौस वन्नियार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और इन पर आरोप हैं कि ये दलित विरोधी राजनीति करने आए हैं और कई बार रामदौस के उकसाने पर दलित विरोधी दंगे भी हुए हैं...2009 में भी चुनावों के दौरान तमिलनाडु में इस तरह के दंगे भड़के थे...। एमडीएमके के वाइको प्रतिबंधित संगठन लिट्टे के समर्थक माने जाते हैं...वाइको ने कई बार राजीव गांधी के हत्यारों का खुलेआम समर्थन किया है और ये कहते आए हैं कि वो बेगुनाह हैं...लिट्टे के पुरजोर समर्थन के बाद इन पर देशद्रोह के आरोप भी लगे हैं और इस आरोप में ये जेल जा चुके हैं...इसके अलावा ये एंटी हिंदी एजिटेशन के आरोप में भी जेल की हवा खा चुके हैं...।
दक्षिण में सुपरस्टार रह चुके विजयकांत की पार्टी DMDK की क्षेत्रीय राजनीति में दखल है लेकिन ये भी सच है कि 2009 लोकसभा चुनावों में DMDK एक भी सीट नहीं जीत पाई थी बाकी दोनों पार्टियों IJK और KMDK का स्थानीय तौर पर भी कोई अस्तित्व नहीं है...ना ही इन दोनों पार्टियों का कोई जनाधार है...KMDK के संस्थापक सदस्यों में से एक इस्वरन 2009 में अपनी सीट भी नहीं जीत पाए थे...। दक्षिण की राजनीति की दो सबसे बड़ी पार्टियों AIADMK और DMK ने पहले ही बीजेपी के साथ आने से इनकार कर दिया है...ऐसे में इन छोटी पार्टियों के सहारे बीजेपी कहां तक जा पाएगी ये देखने वाली बात होगी...बीजेपी को ये भी सोचना चाहिए कि कहीं ऐसे विवादास्पद लोगों से हाथ मिलाने से उत्तर भारत में उनका नुकसान ना हो जाए जहां वो एकता की बात करते हैं, भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाते हैं...।

Posted By : EDITOR IN CHIEF CRIME REVIEW
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